II श्रीराम समर्थ II
डॉक्टर सुषमाताई वाटवे यांचे या श्लोकावरिल श्राव्य निरूपण
जय जय रघुवीर समर्थ !
| विठोने शिरी वाहिला देवराणा। |
| तया अंतरी ध्यास रे त्यासि नेणा॥ |
| निवाला स्वये तापसी चंद्रमौळी। |
| जिवा सोडवी राम हाअंतकाळीं॥८४॥ |
डॉक्टर सुषमाताई वाटवे यांचे या श्लोकावरिल श्राव्य निरूपण
जय जय रघुवीर समर्थ !