Friday, May 20, 2011

श्लोक ७३

II श्रीराम समर्थ II

देहे दण्डणेचे महा दु:ख आहे |
महादु:ख ते नाम घेता न राहे ||
सदाशीव चिंतीतसे देव देवा |
प्रभाते मनी राम चिंतीत जावा ||७३||

डॉक्टर सुषमाताई वाटवे यांचे या श्लोकावरिल श्राव्य निरूपण


 जय जय रघुवीर समर्थ !

Friday, May 13, 2011

श्लोक ७२..

II श्रीराम समर्थ II

न वेचे कदा ग्रन्थिचे अर्थ काही |
मुखे नाम उच्चारितां कष्ट नाही ||
महाघोर संसार - शत्रु जिणावा |
प्रभाते मनी राम चिंतीत जावा ||७२||

डॉक्टर सुषमाताई वाटवे यांचे या श्लोकावरिल श्राव्य निरूपण

 जय जय रघुवीर समर्थ !

Friday, May 6, 2011

श्लोक ७१

II श्रीराम समर्थ II

जयाचेनि नामे महा दोष जाती |
जयाचेनि नामे गति पाविजेति ||
जयाचेनि नामे घडे पुण्य ठेवा |
प्रभाते मनी राम चिंतीत जावा ||७१||

डॉक्टर सुषमाताई वाटवे यांचे या श्लोकावरिल श्राव्य निरूपण



जय जय रघुवीर समर्थ !

Friday, April 29, 2011

श्लोक ७०..

II श्रीराम समर्थ II

सदा राम नामे वदा पूर्ण कामे |
कदा बाधिजेना (आ)पदा नित्य नेमे ||
मदालस्य हा सर्व सोडोनी द्यावा |
प्रभाते मनी राम चिंतीत जावा ||७०||

डॉक्टर सुषमाताई वाटवे यांचे या श्लोकावरिल श्राव्य निरूपण


  जय जय रघुवीर समर्थ !

Friday, April 22, 2011

श्लोक ६९

II श्रीराम समर्थ II

सुखानंद कारी निवारी भयाते |
जनी भक्ति-भावे भजावे तयाते |
विवेके त्यजावा अनाचार हेवा |
प्रभाते मनी राम चिंतीत जावा ||६९||

डॉक्टर सुषमाताई वाटवे यांचे या श्लोकावरिल श्राव्य निरूपण



जय जय रघुवीर समर्थ !

Friday, April 15, 2011

श्लोक ६८....

II श्रीराम समर्थ II

बळे आगळा राम कोदंडधारी |
महाकाळ विक्राळ तोही थरारी ||
पुढे मानवा किंकरा कोण केवा |
प्रभाते मनी राम चिंतीत जावा ||६८||
डॉक्टर सुषमाताई वाटवे यांचे या श्लोकावरिल श्राव्य निरूपण

जय जय रघुवीर समर्थ !

Friday, April 8, 2011

श्लोक ६७ ....

II श्रीराम समर्थ II

घन:श्याम हा राम लावण्य रुपी |
महाधीर गंभीर पूर्णप्रतापी ||
करी संकटी सेवकाचा कुडावा |
प्रभाते मनी राम चिंतीत जावा ||६७||

डॉक्टर सुषमाताई वाटवे यांचे या श्लोकावरिल श्राव्य निरूपण


 जय जय रघुवीर समर्थ !

Friday, April 1, 2011

श्लोक.. ६६

II श्रीराम समर्थ II

नव्हे सार संसार हा घोर आहे |
मना सज्जना सत्य शोधुनि पाहे ||
जनी वीष खाता पुढे सुख कैचे |
करी रे मना ध्यान ह्या राघवाचे ||६६||


जय जय रघुवीर समर्थ !

Friday, March 25, 2011

श्लोक ६५..

II श्रीराम समर्थ II

नको दैन्यवाणे जिणे भक्ति उणे |
अती मूर्ख त्या सर्वदा दु:ख दूणे ||
धरी रे मना आदरे प्रिती रामी |
नको वासना हेमधामी विरामी||६५||


डॉक्टर सुषमाताई वाटवे यांचे या श्लोकावरिल श्राव्य निरूपण


जय जय रघुवीर समर्थ !

Friday, March 18, 2011

श्लोक ६४...

II श्रीराम समर्थ II

अति मूढ त्या द्रुढ बुधि असेना |
अति काम त्या राम चित्ती वसेना ||
अति लोभ त्य क्षोभ होईल जणा |
अति विषयी सर्वदा दैन्य वाणा ||६४||

डॉक्टर सुषमाताई वाटवे यांचे या श्लोकावरिल श्राव्य निरूपण

जय जय रघुवीर समर्थ !